Bhrigu Nandi Nadi Course [Hindi] | Vedicgrace Institute of Astrology Bhrigu Nandi Nadi Course (Hindi) | BNN & Prashna Jyotish — Recorded Online

Bhrigu Nandi Nadi Course with Horary Astrology (Prashna – Kashyap Hora) -(Recorded Course)

Learn how the Rishis read karma through planets, questions and time

  • Master all Vedic & Nadi astrology domains using expert-curated resources
  • Official books & hands-on practice with real astrological techniques
  • Learn from Accredited Astrology Partner with 98% student satisfaction rate
  • Get post-purchase support, astrology guidance & mentorship
Fees: ₹29,500
Duration: 80+ Hrs
Language: Hindi
Categories:
Expert Astrologer

रिकॉर्डेड हिंदी BNN कोर्स की मुख्य विशेषताएं

यह पाठ्यक्रम वैदिक ज्योतिष की दो शक्तिशाली फलादेश प्रणालियों— भृगु नंदी नाड़ी और कश्यप होरा के माध्यम से प्रश्न ज्योतिष —को एक साथ प्रस्तुत करता है।

इन दोनों प्रणालियों का व्यापक अध्ययन विद्यार्थी को बहुत कम समय में फलादेश करने योग्य बना सकता है, क्योंकि एक प्रणाली जन्मकुंडली से जीवन की समग्र रूपरेखा समझाती है, जबकि दूसरी वर्तमान क्षण में पूछे गए प्रश्न का उत्तर देती है।

जब आप भृगु नंदी नाड़ी के साथ कश्यप होरा सीख लेते हैं, तब आपको एक ज्योतिष पाठ्यक्रम से दूसरे पाठ्यक्रम में बार-बार जाने की आवश्यकता महसूस नहीं होगी, क्योंकि यह पाठ्यक्रम जन्मकुंडली से जीवन की विस्तृत रूपरेखा और प्रश्न ज्योतिष से तत्काल उत्तर—दोनों प्रदान करता है।

भृगु योगों, भृगु योगावली से चुने गए योगों तथा भृगु फलित सार के फलादेश सिद्धान्तों के विस्तृत अध्ययन से इस पाठ्यक्रम की गहराई और बढ़ जाती है।

भृगु नंदी नाड़ी, कश्यप होरा, भृगु योग, भृगु योगावली और भृगु फलित सार का यह व्यापक समन्वय पाठ्यक्रम को ऐसी गहराई देता है, जो किसी एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में बहुत कम देखने को मिलती है। यह भृगु परम्परा की कई महत्त्वपूर्ण शाखाओं को एक साथ लाता है और उन्हें व्यावहारिक तथा उपयोगी पद्धति से सिखाता है।

Trainer Vinayak Bhatt
Starts From NA
Class Day NA
Time NA
Duration 80+ Hrs
Language Hindi
Mode Recorded Videos
Supports Dedicated discussion group for students
Certification Certificate of Completion after exam
EMI Facility Available – Call / WhatsApp: +91-9899383340
Refund Policy All course fees are non-refundable under any circumstances

यह भृगु नंदी नाड़ी कोर्स क्यों चुनें?

भृगु नंदी नाड़ी इतनी प्रभावी क्यों है

भृगु नंदी नाड़ी अपनी सीधी और व्यावहारिक फलादेश पद्धति के लिए जानी जाती है। प्रशिक्षित विद्यार्थी मुख्यतः जन्मकुंडली से ही भूत, वर्तमान और भविष्य को समझ सकता है, बिना वर्ग कुंडलियों या जटिल गणनाओं पर निर्भर हुए।

पाठ्यक्रम की मुख्य विशेषताएँ

ग्रहों के अंशों पर आधारित नाड़ी फलादेश पद्धति

यह पाठ्यक्रम विशेष है, क्योंकि इसमें अंश-आधारित नाड़ी फलादेश पद्धति को विस्तार से समझाया गया है।
विद्यार्थी सीखेंगे कि ग्रहों के सटीक अंश और उनका क्रम किसी ग्रह-योग या संयोग के फल को कैसे बदलता है। किसी दूसरे ग्रह से आगे या पीछे स्थित ग्रह अंतिम फलादेश को पूरी तरह बदल सकता है। इस अंश-आधारित तर्क को व्यावहारिक कुंडली उदाहरणों और शोधपूर्ण सामग्री के माध्यम से समझाया जाएगा।

भृगु योगों का फलादेशात्मक तर्क

पाठ्यक्रम में महत्त्वपूर्ण भृगु योगों को उनके ग्रह-संयोग, अंश-क्रम, कारकत्व और व्यावहारिक फलों के आधार पर समझाया जाएगा। विद्यार्थी सीखेंगे कि एक ही योग अलग-अलग कुंडलियों में भिन्न फल क्यों देता है, तथा ग्रहों का बल, गरिमा और क्रम अंतिम फलादेश को कैसे तय करते हैं।

भृगु योगावली के योग

भृगु योगावली के योगों का अध्ययन स्पष्ट फलादेशात्मक तर्क और व्यावहारिक कुंडली उदाहरणों के साथ किया जाएगा। विद्यार्थी समझेंगे कि ये योग शिक्षा, विवाह, धन, व्यवसाय, स्वास्थ्य, संतान, पारिवारिक कर्म और आध्यात्मिक विकास को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।

ध्यान केवल योग-वाक्यों को याद करने तक सीमित नहीं रहेगा। प्रत्येक योग को अलग-अलग भागों में समझाया जाएगा—हर ग्रह की भूमिका, उसके कारकत्व से सूचित घटना, और वह अवधि जिसमें फल प्रकट होने की संभावना है।

भृगु फलित सार के फलादेश सिद्धान्त

पाठ्यक्रम में भृगु फलित सार का विस्तृत अध्ययन भी शामिल होगा। इसमें उसके फलादेश सिद्धान्तों और आधुनिक कुंडलियों में उनके प्रयोग पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। विद्यार्थी सीखेंगे कि यह ग्रन्थ ग्रहों की स्थितियों को जीवन की वास्तविक घटनाओं से किस प्रकार जोड़ता है।

भृगु के गुप्त सिद्धान्त

पाठ्यक्रम में भृगु नाड़ी के कई कम प्रचलित सिद्धान्त भी शामिल होंगे, जैसे:
• कुल-परम्परा और विरासत में प्राप्त कर्म
• ग्रहों के छिपे हुए संबंध
• अंश-आधारित ग्रह-संयोग
• ग्रहों का जीवन-चक्र और गति
• कारकत्वों को जोड़ने की कला
• भूत, वर्तमान और भविष्य की घटनाओं का क्रम
• जीवन की घटनाओं की पहचान
• जीवन-घटनाओं की समयरेखा
• ग्रह-गोचर का व्यावहारिक प्रयोग
• परिवार के माध्यम से कार्यरत अदृश्य कर्म-पद्धतियाँ
• षट्कर्म—शान्ति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण

भृगु नंदी नाड़ी और प्रश्न ज्योतिष–कश्यप होरा द्वारा स्वप्न-विचार

भृगु नंदी नाड़ी के माध्यम से बार-बार आने वाले स्वप्न-चिह्नों का अध्ययन ग्रहों, भावों और ग्रह-संयोगों से जोड़कर किया जा सकता है। जल, अग्नि, सर्प, मन्दिर, पूर्वज, मृत संबंधी, पशु, गिरना, उड़ना, विवाह या संतान-जन्म से जुड़े स्वप्नों के अर्थ कुंडली और उस समय सक्रिय ग्रहों के अनुसार भिन्न हो सकते हैं।
प्रश्न ज्योतिष इसमें एक और महत्त्वपूर्ण स्तर जोड़ता है, क्योंकि जिस क्षण व्यक्ति स्वप्न के विषय में प्रश्न करता है, उसी क्षण की प्रश्न-कुंडली बनाई जा सकती है। इससे ज्योतिषी यह विचार कर सकता है कि स्वप्न मानसिक तनाव, आने वाली घटना, पारिवारिक कर्म, आध्यात्मिक परिवर्तन, भय, उपचार या अवचेतन मन की किसी गहरी छाप से जुड़ा है।

भृगु नंदी नाड़ी के माध्यम से षट्कर्म को समझना

षट्कर्म का शाब्दिक अर्थ “छः कर्म” है। तान्त्रिक परम्परा में इससे छह विशिष्ट क्रियाएँ अभिप्रेत हैं—शान्ति, वशीकरण, स्तम्भन, विद्वेषण, उच्चाटन और मारण। इनका अर्थ क्रमशः हानिकारक प्रभाव को शान्त करना या हटाना, किसी व्यक्ति को प्रभाव में लाना, किसी कार्य को रोकना, अलगाव या संघर्ष उत्पन्न करना, किसी को दूर हटाना और विनाश करना है। इन छह क्रियाओं का उल्लेख तान्त्रिक साहित्य में मिलता है। इन्हें हठयोग की छह शुद्धि-क्रियाओं या सामान्य शुभ कर्मों के लिए प्रयुक्त ‘सत्कर्म’ शब्द से भ्रमित नहीं करना चाहिए।

भृगु नंदी नाड़ी के माध्यम से विद्यार्थी जातक से जुड़े ग्रहों, व्यवधान उत्पन्न करने वाले व्यक्ति, क्रिया के स्वरूप और जीवन के उस क्षेत्र का अध्ययन करेगा जिस पर उसका प्रभाव पड़ रहा है। ग्रह-युति, त्रिकोण संबंध, अंश-क्रम, कारकत्व, राशि-स्वामी या डिस्पोजिटर संबंध और गोचर को जोड़कर यह समझा जाएगा कि कुंडली शान्ति, नियंत्रण, अवरोध, अलगाव, विस्थापन या विनाशकारी उद्देश्य में से किस ओर संकेत करती है।

कश्यप होरा द्वारा प्रश्न ज्योतिष

भृगु नंदी नाड़ी के साथ विद्यार्थी कश्यप होरा का भी अध्ययन करेंगे, जो प्रश्न ज्योतिष की एक महत्त्वपूर्ण प्रणाली है।
कश्यप होरा ज्योतिषी को प्रश्न पूछे जाने के ठीक समय से उसका उत्तर देने में सहायता करती है। जन्म-समय उपलब्ध न हो, जन्म-विवरण संदिग्ध हों, या किसी व्यक्ति को तत्काल मार्गदर्शन चाहिए हो, तब यह विशेष रूप से उपयोगी होती है।

जन्मकुंडली और प्रश्न-कुंडली का संयुक्त प्रयोग

भृगु नंदी नाड़ी जन्मकुंडली के माध्यम से जीवन की व्यापक रूपरेखा समझाती है।
प्रश्न ज्योतिष तत्काल स्थिति, विषय की वर्तमान अवस्था और सम्भावित परिणाम को स्पष्ट करता है।
जब दोनों प्रणालियों का एक साथ प्रयोग किया जाता है, तब ज्योतिषी को प्रश्न का अधिक विस्तृत और पूर्ण चित्र मिलता है। इससे फलादेश अधिक सही और स्पष्ट होता है।

सटीक फलादेश के लिए ग्रह-कारकत्वों को जोड़ना

पाठ्यक्रम में विद्यार्थियों को किसी एक सुविधाजनक अर्थ को चुनकर शीघ्र कथन करने से बचना सिखाया जाएगा। वे सीखेंगे कि ग्रहों के अंश-क्रम, संबंधित भाव, योग में सूचित व्यक्तियों और वास्तविक जीवन में घट रही घटना के साथ अनेक प्रासंगिक कारकत्वों को कैसे जोड़ा जाए।

कारकत्वों को क्रमबद्ध ढंग से जोड़ने की यह प्रक्रिया विद्यार्थी को “कार्य से जुड़ी कोई घटना होगी” जैसे अस्पष्ट कथन से आगे ले जाती है। इससे वह अधिक निश्चित निष्कर्ष तक पहुँच सकता है— क्या हो रहा है, उससे कौन या क्या जुड़ा है, जीवन का कौन-सा क्षेत्र प्रभावित है, घटना किस प्रकार आगे बढ़ेगी, वह कब घटेगी और अनुमानित घटना को किस प्रकार संभालना चाहिए।

व्यावहारिक कुंडली-विश्लेषण और फलादेश का प्रयोग

पाठ्यक्रम को व्यावहारिक ढंग से तैयार किया गया है, ताकि विद्यार्थी केवल सिद्धान्त तक सीमित न रहें।
प्रशिक्षण का मुख्य ध्यान कुंडली-पठन, घटना की पहचान, अंश-आधारित निर्णय, प्रश्न-कुंडली विश्लेषण और स्पष्ट फलादेश पर रहेगा।
उद्देश्य यह है कि विद्यार्थी समझ सके कि ग्रह वास्तविक जीवन में घटनाएँ किस प्रकार उत्पन्न करते हैं और अधिक स्पष्टता तथा आत्मविश्वास के साथ फलादेश कैसे किया जा सकता है।

अपनी गति से सीखें

रिकॉर्डेड पाठ्यक्रम लाइव पाठ्यक्रम से किसी प्रकार कम नहीं है। यह आपको अपनी गति से सीखने की सुविधा देता है। आप जब चाहें रिकॉर्डिंग देख सकते हैं।

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थी को और अधिक सिद्धान्तों से भरना नहीं, बल्कि उसके मन को सही ढंग से कुंडली पढ़ने, सक्रिय कर्म की पहचान करने और आत्मविश्वास के साथ स्पष्ट फलादेश देने के लिए प्रशिक्षित करना है। नियमित अभ्यास से विद्यार्थी इन दोनों प्रणालियों का उपयोग जन्मकुंडली-विश्लेषण, वर्तमान जीवन के प्रश्नों और तत्काल निर्णय लेने में कर सकता है।

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Students with basic knowledge of planets, signs, and houses can join. Those completely new to astrology should first learn foundational chart-reading concepts.

This is a recorded self-paced online course in Hindi. Lessons are organized in structured modules for flexible learning.

Access duration details are shared during enrollment. Students receive adequate time to complete and revise the full program.

Any standard Vedic astrology software or mobile app can be used. The course focuses on prediction logic rather than software operation.

The program focuses on prediction methods through Bhrigu Nandi Nadi and Prashna astrology. Remedies are discussed only when relevant to chart interpretation.

Students with prior astrology knowledge can apply the techniques with practice. Professional readiness depends on experience and chart work.

Yes. Since the course is recorded, students can learn from anywhere at their convenience.

If you miss any session, you can watch the class recordings and clear your doubts in the student discussion group or during the next live class.

Yes. EMI options may be available. Please contact the support team for details.

No. All course fees are non-refundable under any circumstances. Please enroll only if you are serious about learning Bhrigu Nandi Nadi and Prashna astrology.

Yes. Student charts and real-life Prashna questions are frequently used during classes and practice sessions. This helps you understand BNN techniques and predictions in a practical way.

The course is conducted in a live batch format. Doubts are taken in class and in the discussion group. If you attend regularly and do homework, you will get enough interaction

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